रविवार, 4 अप्रैल 2010

दोस्त

आंसू बहाना तू मेरे जनाज़े पर ....

मैं तेरे आस पास ही रहूँगा रूह बनकर ....

आँख बंद कर , महसूस करना -

मेरा हाथ होगा तेरे कंधे पर ,

चाहे कोई तुम्हे पागल समझे या कहे दीवाना ....

बस मुस्कुरा देना धीमे से ....

तब मुझे अफ़सोस होगा मौत का ,

और मैं मौत को भी जी सकूँगा !!

-
प्रण-


शनिवार, 27 मार्च 2010

कठिन है जीवन की डगर ,
पर तेरे साथ ये सफ़र आसान सा लगता है !
ये ऐशो-आराम की दुनिया ,
इसमें कोई रस ही नहीं ,
साथ तेरा हो तो ,
रेगिस्तान भी नखलिस्तान सा लगता है !!
-प्रण-
तू है क्या , क्या है हुस्न तेरा ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
हूर है तू या परी है तू ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
तू एहसास है ख़ुशी का या खुद-ख़ुशी है तू ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
तू गंगा है प्रेम की या प्रेम का सागर है तू ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
मेरे दम पर है तू या तेरे दम पर हूँ मैं ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
कविता है तू मेरी या मैं हूँ कवि तेरा ,
ये तो वो ही जाने ,जो आँखों से देखे मेरी !!
-प्रण-
हम तो आशिक हैं वफ़ाओ के ,
हमसे बेवफाई कि उम्मीद रखना ,
साथ चलने की खायी है कसम ,
हमसे जुदाई कि उम्मीद रखना !!
-प्रण-
कविता तो आइना है दिल कि बातों का ,
कविता तो तरीका है भावनाए दिखाने का ,
कविता तो जरिया है सुकून पाने का ,
कविता तो सूरज है आशाओं का ,
कविता तो विश्वास है अपनेपन का ,
कविता तो प्रेम है प्रेमी का !!
-प्रण-

शनिवार, 13 मार्च 2010

दिल चुराना और लौटाना ये अदा है हसीनाओ की ,

मुझे मालूम है कि तुझ से हसीं और कोई नहीं !
दिल तोडना तो इक अदा है बेवफ़ाओ कि ,

मुझे यकीं है कि तू बेवफा नहीं !


मंगलवार, 9 मार्च 2010


मेरे अंदर के कलाकार को आकार दे दो ,
मचल रहे मेरे अंतर में ,शब्दों को ग़ज़ल का नाम दे दो !
कब से ढूँढ रहा था मैं तुम्हे , अब जो मिले हो तो ,
मेरे जीवन को नया मुकाम दे दो !
तन - मन प्यासा है मेरा जन्मो-जन्मो से ,
बरसा के अपना प्रेम , इसे बारिश का नाम दे दो !
जानता हूँ मैं तुम्हारी मजबूरियां पर ,
अपने जीवन में से कम से कम एक शाम दे दो !

बुधवार, 25 नवंबर 2009

बेचारी सास
एक छोटा सा परिवार -माँ , बेटा और बहू ! बस तीन प्राणी ! दो महीने पहले ही बेटे की शादी हुई है , सास बहू से परेशान है बहू दहेज़ में कुछ खास नही लाई, जब की उम्मीद थी - भरे पूरे परिवार से है ,खूब दहेज़ लाएगी !
परेशान सास ने एक दिन बालकोनी में बाल सुखा रही बहू को धक्का दे दिया ,बहू नीचे गिर गई ,बेटे को ऑफिस में ख़बर मिली तो दौड़ा आया ,माँ और पत्नी को पड़ोसियों ने अस्पताल में भरती करा दिया था , पत्नी की रीड की हड्डी टूट गई थी ,सदमे में थी कुछ बोल - पहचान नही रही थी और माँ ,बहू के बचने के सदमे और सज़ा के डर से दिल का दौरा पड़ने पर स्वर्ग सिधार गई थी !
लोग बातें कर रहे थे " कितना प्यार करती थी , अपनी बहू को , सदमा न सहन न कर सकी बेचारी " सिधार गई !

रविवार, 15 मार्च 2009

सपने

जिंदगी में सपने देखिये !

उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करिए !

फ़िर -

जिंदगी कितनी खूबसूरत है महसूस करिए !

बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

इन्तहा

मैं बहुत तड़पा हूँ तेरे इंतजार में ,

अब तो इन्तहा हो गई तेरे प्यार में !

पर करूंगा इंतजार तेरा , चाहे सदियाँ गुज़र जाएँ ,

या तब तक , जब तक इन्तहा न कहे ,

अब तो इन्तहा हो गई !!

शब्द

मचल रहे हैं शब्द आज कुछ यूँ ,
मेरे जेहन में !
कि लिख दूँ एक किताब ,
तेरे -मेरे एहसासों पर !

उम्मीद

तू ही उदास है ,

मैं नहीं !

मैं तो उम्मीदों से भरा हूँ ,

चाहे तो अगले जन्म में देख लेना !!

अब तो आजा !

जी चाहता है यूँ ही लिखता रहूँ और जिंदगी गुजर जाए ,
जब तक कि तेरी यादों के साथ तू न आए !
काश कि मेरे दिल कि तड़प से तेरी पहचान हो जाए ,
वरना मेरी जिंदगी यूँ ही तमाम हो जाए !
मैं यूँ ही मरता रहा हूँ और मरता रहूँगा ,मरे बगैर ,
अब तो आजा , मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी तेरे बगैर !

तेरे बगैर !



तू क्या जाने कितना तड़पता हूँ मैं तेरे बगैर ,


इतना तो मछलियाँ भी न तड़पती होंगी पानी के बगैर !


तू क्या जाने कितनी सूनी होती है जिंदगी तेरे बगैर ,


ये तो यूँ है मानो ,चाँद है चांदनी के बगैर !


तू क्या सोचती है ये जिंदगी , जिंदगी है तेरे बगैर ,


ये तो यूँ है मानो , शरीर है साँसों के बगैर !

अब तू बता !

अब मेरी तो तमन्ना नहीं ,

और जीने की !

तेरे बगैर !!

तेरा क्या ख्याल है ,

अब तू बता दे !!!