
मेरे अंदर के कलाकार को आकार दे दो ,
मचल रहे मेरे अंतर में ,शब्दों को ग़ज़ल का नाम दे दो !
कब से ढूँढ रहा था मैं तुम्हे , अब जो मिले हो तो ,
मेरे जीवन को नया मुकाम दे दो !
तन - मन प्यासा है मेरा जन्मो-जन्मो से ,
बरसा के अपना प्रेम , इसे बारिश का नाम दे दो !
जानता हूँ मैं तुम्हारी मजबूरियां पर ,
अपने जीवन में से कम से कम एक शाम दे दो !
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