रविवार, 4 अप्रैल 2010

दोस्त

आंसू बहाना तू मेरे जनाज़े पर ....

मैं तेरे आस पास ही रहूँगा रूह बनकर ....

आँख बंद कर , महसूस करना -

मेरा हाथ होगा तेरे कंधे पर ,

चाहे कोई तुम्हे पागल समझे या कहे दीवाना ....

बस मुस्कुरा देना धीमे से ....

तब मुझे अफ़सोस होगा मौत का ,

और मैं मौत को भी जी सकूँगा !!

-
प्रण-


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