
तू क्या जाने कितना तड़पता हूँ मैं तेरे बगैर ,
इतना तो मछलियाँ भी न तड़पती होंगी पानी के बगैर !
तू क्या जाने कितनी सूनी होती है जिंदगी तेरे बगैर ,
ये तो यूँ है मानो ,चाँद है चांदनी के बगैर !
तू क्या सोचती है ये जिंदगी , जिंदगी है तेरे बगैर ,
ये तो यूँ है मानो , शरीर है साँसों के बगैर !
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