शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

- तो कुछ बात बने -

वक्त के सांचे में ढलना सभी को आता है ,
वक्त को सांचे में ढालो तो कुछ बात बने !
अच्छे समय में हँसना सभी को आता है ,
हँसते हुए बुरे वक्त को बिताओ तो कुछ बात बने !
जिंदगी तो यूँ भी कट जायेगी ,
जिंदगी को निखार के , संवार के , बिताओ तो कुछ बात बने !
लड़े बिना ही हार गए जिंदगी में ,
मुश्किलों से लड़कर बनो सिकंदर ," प्रवीण " तो कुछ बात बने !

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