गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

हूँ मैं , दर्पण की भांति


हूँ मैं , एक दर्पण की भांति ,
देखोगे मुझमें , तो ख़ुद को ही पाओगे !
आँखों में भरकर - प्यार , जो देखा मुझे तो ,
प्यार ही प्यार वहां पाओगे !
देखा मुझे जो नफरत से भरकर ,
तो नफरत ही नफरत वहां पाओगे !
हूँ मैं , एक दर्पण की भांति ,
जो देखोगे मुझमें , तो ख़ुद को ही पाओगे !

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