सोमवार, 2 फ़रवरी 2009

मेरी तरह

तू भी मेरी तरह है चाँद !!


सिसकता है ,रात भर चांदनी की बाँहों में !!


भटकता है ,रात भर अनजानी राहों में !!


प्रियतम से मिलन है ,एक कल्पित स्वप्न !!


बिखेरते रहो शबनम, प्यासी कराहों में !!

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