मन का हो तो अच्छा , ना हो तो बहुत अच्छा !
जब जब भी मैं ये पंक्तियाँ सुनता हूँ !
मुझे कुछ होता है !
मैं सोच में पड़ जाता हूँ !
इन पंक्तियों में छिपी गहराई तक जाने का प्रयास करता हूँ !
इन पंक्तियों की गहराई नहीं ढूंढ पाता हूँ !
साँस टूटने से पहले ही गहराई से बाहर आ जाता हूँ !
फिर - फिर प्रयास करता हूँ कि.............................
कभी तो मैं सफल होऊंगा ही !!!!!!!!!!!!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें