शनिवार, 31 जनवरी 2009

मन का हो तो अच्छा , ना हो तो बहुत अच्छा !


जब जब भी मैं ये पंक्तियाँ सुनता हूँ !


मुझे कुछ होता है !


मैं सोच में पड़ जाता हूँ !


इन पंक्तियों में छिपी गहराई तक जाने का प्रयास करता हूँ !


इन पंक्तियों की गहराई नहीं ढूंढ पाता हूँ !


साँस टूटने से पहले ही गहराई से बाहर आ जाता हूँ !


फिर - फिर प्रयास करता हूँ कि.............................


कभी तो मैं सफल होऊंगा ही !!!!!!!!!!!!




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