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Praveen Gulati
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009
दोस्त
बसता
है
ख़ुद - खुदा दोस्त में !
गौर से देखोगे तो उसमें उसे ही पाओगे !
जो
सुख
बढ़ा पाए , दुःख
कम
कर पाए !
ऐसे ही इंसान में दोस्त की छवि तुम पाओगे !
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