जब भी देखता हूँ तुझे उदास ,
मेरी जिंदगानी सूनी हो जाती है !
गम तो लाखो हैं , ज़माने में ,
पर तू ही क्यूं उनकी हकदार हो जाती है !!
तुमने तो कहा था सब सुख - दुःख , अब हम दोनों के हैं ,
फिर तू ही क्यूं , अकेली ग़मों की शिकार हो जाती है !
तू यूं ना हुआ कर उदास , तुझे ऐसे देखकर ,
मेरी उम्र आधी हो जाती है !!
जी तो करता है आग लगा दूं जमाने को ,
पर बेबस सी मेरी रूह देखती रह जाती है !
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